Thursday, April 11, 2019

जब तुम रूठती हो

सुनो, जब तुम रूठती हो 
बड़ी अच्छी लगती हो,
मासूम हो जाती हो और भी 
जिद पर जब अड़ती हो, 

कहती हो झूठ भी 
जब  बेबुनियादी से,   
सच कहता हूँ
सच से भी सच्ची लगती हो,

जब तुम रूठती हो 
बड़ी अच्छी लगती हो |

सुनाती हो जब 
बातें अटपटी सी,
थोड़ी मीठी 
थोड़ी चटपटी सी,
बच्चों से भी बच्ची लगती हो

जब तुम रूठती हो 
बड़ी अच्छी लगती हो |

ये जो बचपना है तुममे 
इसे खोने  न देना,
मुस्कुराना तुम हमेशा 
ये आँखें नम होने न देना ,
इरादों की तुम पक्की लगती हो 

जब तुम रूठती हो 
बड़ी अच्छी लगती हो |

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