Thursday, April 11, 2019

निशाँ क़दमों के तेरे

सूखे पड़े है समंदर इश्क के 
बंजर ये दिल की ज़मीन हो गयी है,
हाल बुरा है, आँखों का रो रो कर ,
पलकें भी ये ग़मगीन हो गयी है

 ढूंढते है कदम भी मेरे,
निशाँ क़दमों के तेरे
अब कैसे समझाऊ इन्हें,
के साथ हम चले थे जिन रास्तो पर   
पत्थर, अब वो जमीन हो गयी है,   

तेरा जो कुछ सामान था मेरे पास 
वो जला दिया एक दिन, गुस्से में मैंने,
मन  मेरा लगा था तेरे बिना जिससे 
अब  वो तस्वीर भी तेरी कही खो गयी है|

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