Thursday, April 11, 2019

चलि गयी वो

चलि गयी वो
यूं हाथ छुड़ा कर,
मासूम तरसती 
आंखों को रुलाकर,
जिये जो थे साथ
वो दिन वो रात,
वो बात और जज्बात 
सब एक साथ भुलाकर,

न रोने का वादा दिलाया
फिर मिलने का बहाना बनाकर,
और बढ़ी दवे से पाओं से
मेज़ से अपनी तस्वीर उठाकर,

समय से सोना
समय से खाना,
और अपना ध्यान रखना,
समझदारी के सब पाठ पढ़ाकर
,
चलि गयी वो
यूं हाथ छुड़ा कर
,
मासूम तरसती 
आंखों को रुलाकर।

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